Mein Lehrer Aufsatz in Hindi Sprache

Posted on by Dijinn

Mein Lehrer Aufsatz In Hindi Sprache




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अध्यापक हमारे जीवन में वह व्यक्ति होता है, जो हमें अच्छी शिक्षा के साथ बहुत सी अन्य महत्वपूर्ण चीजों को सिखाता है। एक अध्यापक अपने विद्यार्थियों के लिए बहुत अधिक मायने रखता है। वह हमारे जीवन में विकास की प्रारम्भिक अवस्था से हमारे परिपक्व होने तक बहुत अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वह हमें और हमारे भविष्य को देश के जिम्मेदार नागरिक बनाने की ओर मोड़ देते हैं। हम यहाँ मेरे प्रिय अध्यापक पर निबंध उपलब्ध करा रहे हैं, जो छोटे और बड़े निबंधों के रुप में वर्गीकृत किए गए हैं। आप मेरे प्रिय अध्यापक पर निबंध में कोई भी निबंध अपनी आवश्यकता और जरुरत के अनुसार चुन सकते हैं। मेरे प्रिय अध्यापक पर लिखे गए सभी निबंध सरल और साधारण वाक्यों का प्रयोग करके लिखे गए हैं। इसलिए आप इनमें से कोई भी निबंध को चुन सकते हैं:

मेरे प्रिय शिक्षक पर निबंध (माय फ़ेवोरेट टीचर एस्से)

Sie können unten einige Aufsätze auf Mein Lieblingslehrer in Hindi für Studenten in 100, 150, 200, 250, 300 und 400 Wörtern erhalten.

मेरे प्रिय अध्यापक पर निबंध 1 (100 शब्द)

मेरी प्रिय अध्यापिका का नाम रजनी सिंह है। वह मेरी कक्षा अध्यापक भी है और हर सुबह हमारी उपस्थिति दर्ज करती है। वह बहुत ही सख्त अध्यापिका है हालांकि, वह स्वभाव में बहुत ही मजाकिया और देखभाल करने वाली अध्यापिका है। वह बहुत ही अनुशासित और समय की पाबंद महिला है। वह कक्षा से संबंधित सभी कार्य और प्रोजेक्टों को देरी किए बिना सही समय पर करती है। मैं उन्हें बहुत अधिक पसंद करती हूँ क्योंकि, वह हमें पढ़ाने और अच्छी चीजों को सिखाने के लिए बहुत ही आसान तरीका प्रयोग करती है। हम कक्षा में उनकी उपस्थिति का आनंद लेते हैं।

वह हमें हिन्दी पढ़ाती है। वह हमें पढ़ाते समय कुछ मनोरंजक बातों को बताकर पढ़ाई को रुचिपूर्ण बनाती है। वह हमें किसी भी कक्षा प्रतियोगिता या आन्तरिक स्कूल प्रतियोगिता के दौरान बहुत अच्छे से दिशा निर्देशित करती है। वह हमें कक्षा में अपने सहपाठियों के बीच में चीजों को मिलजुल कर बाँटने की सलाह देती हैं।

मेरे प्रिय अध्यापक पर निबंध 2 (150 शब्द)

मेरी कक्षा अध्यापिक ही मेरी प्रिय अध्यापक है। उनका नाम निशा गुप्ता है। वह हमारी उपस्थिति दर्ज करती है और हमें हिन्दी, गणित और कला पढ़ाती है। वह बहुत अधिक शिक्षित है और उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से प्राप्त की है। वह हमें सभी विषयों को पढ़ाने के दौरान बहुत ही आसान और प्रभावी रणनीतियों का पालन करती है। मैं कभी भी उनकी कक्षा को छोड़ता नहीं हूँ और उनकी कक्षा में हमेशा उपस्थित रहता हूँ। मैं उनके पढ़ाने के तरीके को बहुत अधिक पसंद करता हूँ, क्योंकि उनके पढ़ाने के बाद हमें उस विषय को घर पर दुबारा पढ़ने की आवश्यकता नहीं रहती है। वह कक्षा में हमें जिस विषय को समझाती है, उससे संबंधित सभी बिन्दुओं को स्पष्ट करती है। वह कक्षा में विषय की अवधारणा को स्पष्ट करने के बाद, हमें कक्षा में उस विषय से संबंधित अभ्यास कार्य और घर के लिए गृह कार्य देती है। अगले दिन, वह कल के विषय से संबंधित प्रश्न करती है और उसके बाद अन्य विषय को शुरु करती है।

विषयों के अतिरिक्त, वह हमारा चरित्र मजबूत बनाने के लिए अच्छी नैतिकता वाले आचरण को सिखाती है। शायद; अगले साल वह हमारी कक्षा अध्यापक नहीं बने हालांकि, उनकी दी गई शिक्षाएं हमेशा मेरे साथ रहेंगी और कठिन समय में हमें सही रास्ता दिखाएगी। वह स्वभाव से बहुत अधिक प्यार करने वाली और नम्र है। वह उच्च शिक्षा के दौरान विश्वविद्यालय में स्वर्ण पदक विजेता रही थी। वह हमेशा मेरी सबसे अच्छी अध्यापिका रहेंगी।

मेरे प्रिय अध्यापक पर निबंध 3 (200 शब्द)

स्कूल में गीता गोस्वामी मेरी सबसे प्रिय अध्यापिका है। मैं कक्षा 4 में पढ़ता हूँ, और वह हमें ईवीएस (पर्यावरण अध्ययन) विषय पढ़ाती है। वह बहुत अच्छी अध्यापिका है। वह हमारा बहुत अधिक ध्यान रखती है और आसान तरीकों का प्रयोग करके हमें पढ़ाती है। वह कभी भी अध्ययन को गंभीर नहीं बनाती है और मनोरंजक गतिविधियों का प्रयोग करके हमें पढ़ाती है। वह कक्षा में हमेशा सही समय पर आती है और कभी भी अपनी कक्षा लेना नही भूलती है। हम उनकी उपस्थिति में कक्षा में बहुत अधिक आनंद लेते हैं, क्योंकि वह हम सभी को खुश भी करती है। वह मुझे बहुत अधिक प्यार करती है, क्योंकि मैं कक्षा में सबसे अधिक अनुशासित और आदर्श विद्यार्थी हूँ। मैं उनके सभी आदेशों का पालन करता हूँ और हमेशा अपने कक्षा के कार्य और गृह कार्य को साफ व स्वच्छ ढंग से करता हूँ।

मैं उनकी कक्षा में कभी भी देरी से पहुँचता या अनुपस्थित नहीं होता हूँ। वह हमें जीवन में हमेशा सही रास्ते का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करती है, चाहे हम कितनी भी बड़ी कठिनाई में क्यों न फसे हों। वह हमें हमेशा बताती है कि, कभी भी नकारात्मक नहीं सोचना चाहिए और हमेशा सकारात्मक सोचना चाहिए, क्योंकि जैसा हम सोचते हैं, हमारे साथ हमेशा वैसा ही होता है। वह पर्यावरण के विषय पर हमें बहुत अच्छे से समझाती है। वह चाहती है कि, हम उनकी कक्षा में हिन्दी भाषा का प्रयोग करें। वह अपने घर हमारी स्कूल बस में हमारे साथ जाती है, जहाँ हम बस में उनके साथ गाना गाने और कविता गाने के द्वारा बहुत अधिक आनंद लेते हैं।


 

मेरे प्रिय अध्यापक पर निबंध 4 (250 शब्द)

जब मैं कक्षा 3 और 4 में था, उस समय मेरे प्रिय अध्यापक सुनील दत्त थे, जिन्होंने मुझे दो साल तक अंग्रेजी और गणित पढ़ाया था। वह बनारस से थे हालांकि, स्कूल के आसपास के क्षेत्र में रहते थे। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से पूरी की थी। उनका स्वभाव बहुत ही नम्र और दयालु था। वह कक्षा में छोटे बच्चों को संभालना अच्छे से जानते थे। उनके पढ़ाने का अद्वितीय ढंग मुझे आज भी याद है। जो कुछ भी उन्होंने मुझे पढ़ाया, वो सबकुछ मुझे आज भी याद है। उन्होंने मेरी गणित अवधारणाओं को स्पष्ट किया। वर्तमान में, मैं कक्षा 5 में पढ़ता हूँ हालांकि उन्हें बहुत याद करता हूँ। जब कभी भी मुझे गणित के कठिन सवालों को हल करने की आवश्यकता पड़ती है, तो मैं उनसे कभी-कभी मिलता भी हूँ। वह अच्छे शरीर, चमकदार आँखे और भूरे बालों के साथ बहुत ही अच्छे लगते हैं। मैं उन्हें अच्छे व्यक्तित्व और नम्र स्वभाव के कारण बहुत अधिक पसंद करता हूँ।

वह हमेशा मुस्कुराते हुए हमारी कक्षा में प्रवेश करते थे और सबसे पहले हमारे स्वास्थ्य के बारे में पूछते थे। जब कभी भी खेल के अध्यापक अनुपस्थित होते थे, तो उन्हें हमेशा खेल के सहायक अध्यापक के रुप में भी नियुक्त किया जाता था। उनका मुस्कुराता हुआ चेहरा है हालांकि, अध्ययन में बहुत ही सख्त है। वह हमेशा उन विद्यार्थियों को सजा देते थे, जो अपना गृह कार्य पूरा नहीं करते थे। वह शिक्षण की अच्छी तकनीकियों के साथ, दोस्ताना स्वभाव, हास्य, धैर्यवान और आसानी से सभी परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने वाले अच्छे अध्यापक थे। मैं उनके आज्ञाकारी विद्यार्थियों में से एक था। कभी-कभी वह हमें कक्षा टेस्ट में और परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने पर चॉकलेट देते थे। वह घर के लिए कभी भी बहुत अधिक गृह कार्य नहीं देते थे। वह बहुत ही उत्साहित और हमें हमेशा पढ़ाई में सबसे अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित करते रहते थे।

मेरे प्रिय अध्यापक पर निबंध 5 (300 शब्द)

कक्षा 6 में रश्मि मैम मेरी सबसे प्रिय अध्यापिका है। वह हमें कक्षा में हिन्दी और कम्प्यूटर पढ़ाती है। उनका व्यक्तित्व एकदम अलग है। वह बहुत मोटी है पर स्वभाव से नम्र है। मैं हर साल शिक्षक दिवस पर उन्हें ग्रीटिंग कार्ड देता हूँ। मैं उनके जन्मदिन पर भी उन्हें हमेशा शुभकामनाएं भी देता हूँ। वह कक्षा में पढ़ाई के दौरान मनोरंजन के लिए कुछ चुटकुले भी सुनाती है और कक्षा की ओर हमारा ध्यान खिंचती है। मैं हिन्दी विषय में बहुत अच्छा नहीं हूँ हालांकि, कम्प्यूटर में बहुत अच्छा करता हूँ। वह हिन्दी भाषा को सुधारने में मेरी बहुत मदद करती है। कक्षा लेने के बाद में, वह हमेशा कुछ प्रश्नों के उत्तर खोजने और याद करने के लिए देती है और उन्हें अगले दिन पूछती है।

वह क्म्प्यूटर के बारे में हमारी अवधारणाओं को अधिक निश्चित और स्पष्ट बनाने के लिए हमें कम्प्यूटर की प्रयोगशाला में ले जाती है। वह पढ़ाते समय बिल्कुल शान्ति पसंद करती है। वह कभी भी अपने कमजोर विद्यार्थी को अपने पढ़ाए हुए पाठ के, समझ न आने पर उसे स्पष्ट किए बिना नहीं छोड़ती है। वह सभी को कक्षा में पढ़े गए विषयों को स्पष्ट करती है और हमें उससे संबंधित प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित करती है। वह कभी भी अगला पाठ तब तक शुरु नहीं करती, जब तक कि हम पिछले वाले को पूरी तरह से नहीं समझ लेते हैं। उनका स्वभाव बहुत ही प्यारा और कक्षा के सभी विद्यार्थियों का ध्यान रखने वाला है। उनकी कक्षा के दौरान कोई भी झगड़ा या लड़ाई नहीं करता है। उन्होंने अपनी कक्षा में बैठने के लिए सप्ताहिक आधार पर रोटेशन बनाया हुआ है, ताकि कोई भी विद्यार्थी कमजोर न रहे। मेरे सभी मित्र उन्हें पसंद करते हैं और उनकी कक्षा में नियमित रुप से उपस्थित रहते हैं।

वह अतिरिक्त समय देने के माध्यम से कक्षा के कमजोर विद्यार्थियों की सहायता करती है। वह हमारी पढ़ाई से अलग समस्याओं को भी सुलझाती है। वह हमें पढ़ाई से अलग स्कूल में आयोजित खेलों या अन्य प्रतियोगिताओं में भी भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करती है। वह मुस्कुराते हुए चहरे के साथ बहुत अच्छी लगती है और सहायता करने वाले स्वभाव की है। वह स्कूल में आयोजित उत्सवों के कार्यक्रमों; जैसे- गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गाँधी जयंती, शिक्षक दिवस, मातृ दिवस आदि के दौरान हमारी तैयार होने में मदद करती है। कभी-कभी जब पाठ खत्म हो जाता है तो वह हमें पढ़ाई की ओर प्रोत्साहित करने के लिए अपने जीवन के संघर्ष के दिनों के बारे में बताती है। वह बहुत ही मित्रवत व्यवहार की सरल अध्यापिका है। हम उनसे कभी भी नहीं डरते हैं हालांकि, उनका सम्मान बहुत करते हैं।


 

मेरे प्रिय अध्यापक पर निबंध 6 (500 शब्द)

मेरी प्रिय अध्यापिका विज्ञान की शिक्षक है। उनका नाम संजना कौशिक है। वह स्कूल परिसर के पास ही रहती है। वह स्कूल की सबसे अच्छी अध्यापिका है और उन्हें मेरे सभी मित्र बहुत पंसद करते हैं, क्योंकि वह बहुत अच्छा पढ़ाती है। कोई भी उनकी कक्षा में ऊबता नहीं है, क्योंकि वह पढ़ाई के दौरान कुछ मनोरंजक बातें भी बताती है। मैं कक्षा में उनके पढ़ाने की रणनीति को बहुत अधिक पसंद करता हूँ। वह कक्षा में जो भी पाठ अगले दिन पढ़ाने वाली होती है, उसे सभी विद्यार्थियों को घर से पढ़कर आने के लिए कहती है। वह कक्षा में उस पाठ को पढ़ाती है और उसे स्पष्ट करने के लिए बहुत से प्रश्न करती है। वह अगले दिन भी उसी पाठ पर सवाल करती है। इस तरह से, हम एक विशेष पाठ के बारे में पूरी तरह से जान लेते हैं। वह तीन या चार पाठ पढ़ाने के बाद में टेस्ट लेती है। वह शिक्षक के पेशे से प्यार करती है और हमें पूरे जोश और उत्साह के साथ पढ़ाती है।

वह हमारे साथ बहुत ही मित्रवत व्यवहार करती है और हमें उनसे कभी भी डर नहीं लगता है। हम बिना किसी डर के कक्षा में या उनके केबिन में उनसे कोई भी प्रश्न पूछते हैं। वह कक्षा में पढ़ाने के दौरान प्रत्येक और सभी विद्यार्थियों की गतिविधियों को देखती है और शरारती बच्चों को दंडित भी करती है। वह हमें हमेशा पढ़ाई पर ध्यान देने और कक्षा में जो भी अध्यापक कुछ कह रहा है उसकी बातों का पालन करने के लिए कहती है। वह हमेशा कहती है कि, यदि आप अपने जीवन में वास्तव में सफल होना चाहते हो, तो आपको अपने अध्यापक द्वारा बताई गई चीजों का ध्यान रखना चाहिए और उनका जीवन भर पालन करना चाहिए। वह कमजोर और बुद्धिमान बच्चों में कोई भी भेदभाव नहीं करती है। वह कमजोर बच्चों का बहुत अधिक सहयोग करती है और होशियार बच्चों से कमजोर सहपाठियों की मदद करने का अनुरोध करती है। वह हमें बताती है कि, हमें अपनी पढ़ाई और जीवन के उद्देश्य के बारे में गंभीर होना चाहिए।

वह बहुत अधिक प्रोत्साहित करने वाली अध्यापक है, जो न केवल हमें पढ़ाई में प्रोत्साहित करती है, बल्कि पाठ्योत्तर गतिविधियों में भाग लेने के लिए भी प्रेरित करती है। वह विद्यार्थियों को शैक्षणिक स्तर पर या खेल गतिविधियों में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए व्यक्तिगत रुप से प्रोत्साहित करती है। वह कमजोर विद्यार्थियों को अपने घर में मुफ्त ट्यूशन देती है। सभी छात्र विज्ञान विषय में कक्षा टेस्ट और परीक्षा, दोनों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। वह स्कूल की उप-प्रधानाचार्या भी है। इसलिए, वह अपनी सभी जिम्मेदारियों को अच्छे से निभाती है। वह स्कूल परिसर में हरियाली और स्वच्छता की पूरी तरह से देखरेख करती है।

वह कभी भी गंभीर या गुस्से में नहीं लगती है क्योंकि, उनका चेहरा मुस्कुराता हुआ है। वह स्कूल में हमें अपने बच्चों की तरह खुश रखती है। वह स्कूल में किसी भी कार्यक्रम या प्रतियोगिता के आयोजन पर पूरी तरह से ध्यान रखती है। वह सभी विद्यार्थियों से नम्रता से बात करती है और स्कूल में किसी भी परेशानी वाली परिस्थिति को अच्छे से संभालना जानती है।

 

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